खुशियाँ निकली महंगी बड़ी। Hindi poetry। Happiness

खुशियाँ निकली महंगी बड़ी(hindi poetry)-

मेरी आज की कविता का शीर्षक खुशियाँ है , मेरे अनुसार खुशी जिन्दगी के गणित की ऐसी चर-अचर इकाई है , जिसका महत्व इन्सान की जरुरत ,औधे और समय के पैमाने के साथ बदलता रहता है ।

आशा है आप सभी को मेरी ये नवीन रचनात्मक(creative) कविता पसंद आयेगी ।

खुशियाँ निकली महंगी बड़ी..
खुशियाँ(hindi kavita)

खुशियाँ निकली महंगी बड़ी..  

सफर में निकले थे चाँव से ,खुशियों का एक कारवा बनाने

बड़ा पथरीला था वो रास्ता मगर ,जहाँ थे उन खुशियों के ठिकाने

 

जस-तस दुखों के पत्थर छांट कर ,खुशियों के फूल दामन में भरते गए

बड़े नखरे थे पर खुशियों के भी, एक-एक कर सारे फूल दामन से फिसलते गए

 

कशमकश से घिरे ये जिन्दगी के सिरे ,कुछ अजीबोगरीब लतीफो से भरे

क्यूँ खुशियों के समुंदर में अक्सर , है अतृप्ति के ज्वार बेहद भारी पड़े

 

कही कमाने को 2 वक्त की जरूरत अपनी , है गरीब गुब्बारों की खुशी बेचता

तो कही वक्त नहीं जरूरते जीने को भी , है अमिर खुशिया बटोरने में मशरूफ इतना

 

अरे कीमत चुकानी पड़ती है जनाब ,यहाँ कुछ मुफ्त नहीं किसी के लिए

अपना बहुत कुछ खोना पड़ता है यहाँ ,मात्र रत्ती भर की खुशी के लिए  

 

क्यूँ दुःख प्रायः खुश रहते है हमसे ,और बदलते खुशियों क पैमाने हर पल हर घड़ी

सच कहती हूँ इस दुनिया में यारों ,ये कमबख्त खुशियाँ निकली महंगी बड़ी….

 

Real Happiness exist in the Simplest Things…

 

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Deepmala Singh

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4 Comments

  • Kushiyon ke bare me itni acchi line Mai ne syd hi suni hogi. Yek alag typ ki such ka darsta hai.
    Bs Mai itna janti hu apne tajurbe se ki log kushiyon ki talass me bht aage nikal jate hai. Fir waps ana muskil Ho jta hai. Such to ye hai kushi hamre or Ap ke pss hai apno me hai. Bs jarurt itni hai ki hame us kushiyon ki talass apne Ap se hi krani hogi. thq mala .such a great line and beautiful words ☝?????✌✌

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