Hindi poetry।Truth of life।कौन है अपने-कौन पराये

कौन है अपने कौन पराये ।Truth of life।Hindi poetry–

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कौन है अपने कौन पराये , वक्त ही सबके रंग दिखाए…

कच्चे रंग से रंगे वो रिश्ते, समय के साथ फीके हो जाएं

स्वार्थ-युक्त वो जर्जर धागे, उलझ-उलझ कर टूटे जायें

कौन है अपने कौन पराये , वक्त ही सबके रंग दिखाए..

 

हो जो बढियां वक्त जो अपना , हर शख्स है बेहद अच्छा

बेबस वक्त बता देता है , कौन सा रिश्ता पक्का कच्चा

गम के सागर जो पार करा कर ,हाथ थाम तट पर लाये,

अपनों से गहरे हो जाते , कुछ नाते गैर पराये

कौन है अपने कौन पराये , वक्त ही सबके रंग दिखाए..

 

रिश्तो का वो तौल तराजू, कठिन काल में हल्का सा

रक्त-बद्ध होते है अपने, ये है लगता एक छल सा

गर सुख की वृष्टि हो जाए , हर नाते अपने हो जाए

पर असल मायने अपनों के तो ,लाचार समय ही दर्शाए

कौन है अपने कौन पराये , वक्त ही सबके रंग दिखाए..

 

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Deepmala Singh

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