बलात्कार ( कब तक जियेगी नारी इस भय के साये में )


बलात्कार ( कब तक जियेगी नारी इस भय के साये में )-

बलात्कार  यह वास्तव में केवल एक शब्द नही हैं, बल्कि मन – मष्तिष्क और आत्मा को झकझोर देने वाला एक घिनौंना कुकृत्य है।

ये बलात्कार शब्द औरत के साथ पुरुषो द्वारा हो रही यातनाओं की उस चरम सीमा को दर्शाता है,जिसमें औरतो को शायद जानवरों से बत्तर समझ कर उसका जबरन शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न उस दरिंदगी से किया जाता है की आत्मा भी सिहर सी जाती होगी हर उस पीड़ित औरत की ।

और शायद आजीवन मन ही मन खुद को कोष कर रह जाती होगी की मुझे औरत क्यूँ बनाया ? क्यूँ ढकेला मुझे इस हवस की खायी में ? जहाँ कोई भी पुरुष मात्र अपने Sexual Satisfaction या फिर अपना अधिकार सिद्ध करने के लिए मानवता की सारी हदें पार कर जाता है ।

उन गिद्धों को क्यूँ  मैंने मानव बनाया…?
बलात्कार
बलात्कार: आखिर क्यूँ होते है ?–

भारत में शिक्षा की कमी प्रत्यक्ष रूप से इन अपराधो के पनपने का मूल कारण है,भारत की स्कूलो में आज भी Sex Education कोई अनिवार्य विषय नही माना जाता है ।

यही कारण है जब बलात्कार जैसी घटनाये बेहद कम उम्र की बच्चियों के साथ होता है ,तो वो इसका विरोध करने में सक्षम नहीं हो पाती है,क्यूंकि उन्हें Gud और Bad touch में अंतर तक नही पता होता ।

अभिवावकों(पेरेंट्स) द्वारा बच्चो का उचित पालन पोषण(upbringing) न हो पाना भी इन घिनौनी मानसिकता को पनपने के लिए बहुत हद तक जिम्मेदार है ,ऐसे लोग अशिक्षा की कमी से नेचुरल सेक्स भी हिंसक(Violently) तरीके से करना ही सही समझते है।

इसके अलावा अलग अलग तरीके के मानसिक रोगी होते है ,उनमे से कुछ तो गलत तरीके से हक जता कर उन्हें अगर कोई लड़की पसंद आ गयी तो वो उन्हें हर हाल में वो मिलनी चाहिए, भले ही उस लड़की की हाँ हो या ना । कुछ ऐसे मनोरोगी भी होते है जो जिनके लिए रेप करना या दूसरो को चोट देना एक तरीके का Mental Satifaction होता है।

नारी उत्पीड़न की आग को हवा देती भारत की खोखली  सांस्कृतिक धारणाए–

यूँ तो 21 वी सदी के इस दौर में महिलाएं पुरुषो को हर क्षेत्र में बराबर की टक्कर देती है,पर  ये भारत है यहाँ मात्र कहने के लिए औरतों को देवी माना जाता है , महिलाओ के अधिकार को लेकर बड़े-बड़े भाषण  भी दिए जाते है।

पर वास्तव में एक कड़वा रूढ़िवादी सत्य भारत की छोटी सोच का प्रमाण है की औरतें पुरुषो के लिए मात्र एक वस्तु होती है,उन्हें उनसे दब के ही रहना होता है,ना ही उसे अपनी बात रखने का हक होता है ,ये सब आज भी भारतीय संस्कृति और मर्यादा का हिस्सा माना जाता है ।

भारतीय समाज की ओछी मानसिकता का एक प्रमाण ये भी है की ,कोई लड़की अगर मॉडर्न या खुली विचारधारा की है तो वो लोगो के अनुसार किसी भी चीज के लिए तैयार है, उन्हें  उसके साथ कुछ भी करने का मानो लाइसेंस मिल गया हो।

भारत में बलात्कार जैसे जघन्य अपराधो के लिए इतने नर्म कानून आखिर क्यूँ?

बलात्कार बेशक एक इन्सान द्वारा किया हुआ अपराध है, पर भारत की न्याय पालिका में रेप की सजा का प्रावधान बेहद निराशाजनक सिद्ध हुआ है, दंड में इतनी कमी है फलस्वरूप आजकल देश में खुलेआम रेप की घटनाओ को बड़ी की मर्दानगी के साथ अंजाम देने वाले के तांते से लग गये है।

मानवता की द्रष्टि से बलात्कार से बत्तर कोई अपराध/कुकर्म इस श्रृष्टि में नहीं

2012 में घटित निर्भया कांड जिस निर्ममता और दरिंदगी से किआ गया था,जिसके बाद शायद पूरा देश आक्रोश और दर्द से सिहर गया था ।जिसका निर्णय पूरे 5 वर्ष बाद हुआ और आरोपियों को आखिकार मृत्युदंड की सजा सुनायी गयी ।

5 वर्ष ??  हमारे देश की न्याय पालिका इतनी ठन्डी  और धीमी गति की क्यूँ है? और शायद ये पहला रेप का मामला था ,जिसमे अपराधियों को मृत्युदंड दिया भी गया ,वरना भारत में तो रेप को भी चोरी-चकारी ही जितना आंका जाता है और कुछ वर्षो की सजा दे जाती है और बस हमारी कानून व्यवस्था अमल बनाये रखती है।

भारत में marital rape अपराध के दायरे में ही नहीं–

CNN रिपोर्ट के अनुसार भारत में अनजान लोगो द्वारा औरतो का बलात्कार होने अपेक्षा उन महिलायों की संख्या 40 गुना ज्यादा है ,जो घर में अपने पति द्वारा यौन उत्पीडन का शिकार होती है ,और शायद होती भी रहेंगी क्यूंकि भारत में ये अपराध है ही नहीं या ये कह सकते है की मानो भारत की न्याय व्यवस्था ने ही उन पतियों को कानूननन लाइसेंस दे रखा है पत्निओं का जबरन शारीरिक उत्पीड़न करने का।

शर्मशार कर देने वाले है भारत में बलात्कार(रेप) के आकड़े–

बड़े शर्म की बात है की भारत बलात्कार जैसे घिनौंने अपराधो की श्रेणी में पुरे विश्व भर में चौथे(4) नंबर पे है , और जहाँ 2012 की रिपोर्ट में देश में रेप की दर 1 दिन में 92 थी , वही 2016-17  में बढ़कर 106 हो गयी है।

अगर मात्र 2016-17 के आकड़ो की बात की जाए तो राजधानी दिल्ली में 1996 रेप हुए है सबसे ज्यादा जो की देश भर में सबसे ज्यादा है,उसके बाद मुंबई में 712 ,पुणे में 354, और जयपुर में 330 केस सामने आये है ।

केवल कानून पर दोष मढ़ना  सरासर गलत होगा

चौका देने वाली बात ये भी ये है की 0 से 12 वर्ष की बच्चियों से सबसे ज्यादा बलात्कार(कुल 2116) हुए है, जिन्हें उस शब्द का मतलब भी नहीं पता होता है ।और तो और 94% केस ऐसे है जिसमे अपराधी victim के घर का सदस्य ,पड़ोसी,रिश्तेदार, पति,दोस्त/ सहकर्मी या तो अपने खुद के जानने वालो में से  एक होता है।

तो किस हद तक सरकार / काननों को दिया जाए जब अधिकांश मामले और बलात्कार जैसी महांमारी स्वयं के घरो से ही पैदा हो रही है । और जिस तदाद में हो रही उसमे भारत क्या किसी भी देश के लिए सबको दंड देना असम्भव है ।

 कुछ लोगो को मेरे शब्द कड़वे लग सकते है पर यकीन मानिये भारत ने किसी और क्षेत्र में वृद्धी की हो या न बलात्कार के मामलों में जिस तेज गति विकास कर रहा,कही वो विश्व में पहले नंबर पर न पहुँच जाए ।

ऐसा शायद ही कोई दिन हो जब मैंने News Channels में 10 में से 5  हेडलाइंस बलात्कार के मामलो की न देखी हो, जिसका शिकार पैदा हुई बच्ची से लेकर  बुजुर्ग महिलाये तक होती है ।

शर्म आती है भारत की ये स्तिथि देखकर,समाज को भी बलात्कार की शिकार हुई औरत के प्रति अपनी सोच बदलनी होगी, ,उसने कोई गुनाह नहीं किया है जो उसे शर्म से जीना पड़े । उसे भी पूरा हक है अपनी जिन्दगी सम्मान से जीना का ।

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Deepmala Singh

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2 Comments

  • Sach wakai kadwa hota hai.. Rape ke Yeh aakde saayad yahi sach darshaate hain ki Aaj ka manav wakai artificial intelligence aur robotic duniya mein jee Raha hai.. Jahaan par uski sabhi samvednaaye dam Tod chuki hain.. Sayad woh Bhool chuka hai ki Yeh wahi Dhara hai jahna ke sanskar the… Ytra narystu pujyante ramante Tara devta..

  • Hamare samaj me kya hai .yese log rhte hai jo ki jis chiz ke liye awaz uthani chahiye nhi uthate hai or jis ke liye uthana chahiye uske liye uthate hai.rape shabd ka naam lete hi log apne kaan band kr lete hai .ya tv band kr dete hai.haal hi ki baat leligye yek movie aai thi. Bs wo yek movie thi uske liye logo ne kitna prdarsan kiya.ki hAmare samaj or sanskar ko aagahat pahuch rha hai.or wahi yek student ka rape hua tha.mp me to logo ne uske liye kiu nhi prdarsan nhi kiya.Kass kiya hota to aj ye samaj ki tasavir kb ki badal gai hoti yaar.we r very sem fulllll😈

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